Thursday, 9 October 2014

"लौ " ***




झंझाबात से  जिन हाथों ने "लौ " को घेरकर बुझने से बचाया था
'लौ ' बुझाने का दोष लगाकर ,"लौ " ने ही हाथ को  जला दिया।

हवा का हर झोंका आता है "लौ " को बुझाने के लिए , पर "लौ " की हिम्मत देखो
वह  हिलता है ,डुलता है,कांपता है ,झुकता  है ,फिर तन कर खड़ा हो जाता है।

रातभर जागकर दुआ करते रहे उनकी सलामती  का
अब उनको खामिया नज़र आती है हमारे हरेक काम  में।

कालीपद "प्रसाद "
सर्वाधिकार सुरक्षित  
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8 comments:

  1. बहुत खूब कहा है आपने ...

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  2. बहुत सुन्दर....

    सादर
    अनु

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  3. हाथ मजबूत बने रहें , मंगलकामनाएं !!

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