Monday, 3 December 2012

पर्यावरण -एक वसीयत








हे मनुज !
वसीयत माँगती  तुम्हारी संतति
सुजला   सुफला   धरती
पूर्वजों की धरोहर धरती,
पशु पक्षी के  कलरव से
प्रफुल्लित ,उल्लसित धरती
वृक्ष लता से सज्जित सजीव धरती ,
प्राणवायु से भरपूर और  अमृत जल
जीवन के स्पंदन से स्पंदित धरती।

नहीं मांगती तुम्हारी संतति
वृक्ष लता हीन  वंजर धरती ,
संहारक विषाक्त वायु, अप्राकृतिक निर्झर
सिमटती वन और उजड़ी पर्यावरण

दूषित जल और मुमूर्ष जन
 धरती , जिसमे हो दुर्लभ जीवन।

हे मानव !
लिख दो वसीयत अपनी संतति के नाम
न गज ,न बाजी ,न चाँदी ,न कंचन
केवल हरित धरती ,स्वच्छ जल-वायु
और स्वच्छ पर्यावरण !!!








कालीपद "प्रसाद "
© सर्वाधिकार सुरक्षित




3 comments:

  1. बहुत सुन्दर बात...सार्थक सन्देश....

    सादर
    अनु

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