Sunday, 6 October 2013

कुछ एह्सासें !



प्यार में उचित है  रूठना शिकायत करना
पर इन्हें शिकायतें नहीं, न गुस्ताखी मानना  ll 
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दुनिया अजीब है, सब जगह बंटवारा है
कहीं रिश्तेदारों का, कहीं जर जमीं का ll 
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फुल कहीं भी खिले ,जी भर खुलकर खिले 
मुरझा गए, अपनी खुशबू को छोड़ गए हैं  ll
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समझ और समझौता जिंदगी का सार है
सफल और सुखमय जिंदगी की कुंजी है ll
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वक्त होता है कभी वक्त से वलवान .
देता कभी मान तो कभी अपमान ll 
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लौटकर नहीं आते वो दिन जो बीत गए  
जख्म को ताज़ा रखने केवल यादों में वो रह गएll
अंधेरी रात में जैसे चाँद तारों के साथ,
मन के आँगन में आ गई यादों की बारातll
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धूम धाम से दिखावा का पूजा करनेवाले 
दिल से भगवान को नहीं मानते ll
धर्मं का धंधे करने वाले
प्यार मुह्हबत को नहीं मानते ll
धर्म तो क्या? चढावा न मिले तो
पुजारी भगवान को भी नहीं पहचानते ll
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कालिपद 'प्रसाद '

16 comments:

  1. बहुत सुन्दर प्रस्तुति.. आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी पोस्ट हिंदी ब्लॉग समूह में सामिल की गयी और आप की इस प्रविष्टि की चर्चा कल - सोमवार - 07/10/2013 को
    अब देश में न आना तुम गाधी
    - हिंदी ब्लॉग समूह चर्चा-अंकः31
    पर लिंक की गयी है , ताकि अधिक से अधिक लोग आपकी रचना पढ़ सकें . कृपया पधारें, सादर .... Darshan jangra


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  2. सुंदर अभिव्यक्ति ,,,
    नवरात्रि की बहुत बहुत शुभकामनायें-


    RECENT POST : पाँच दोहे,

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  3. sundar parstuti...jeevan ka sar.....

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  4. नवरात्रि की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं

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  5. बहुत ख़ूब! नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं

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  6. सुन्दर रचना

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  7. लाजवाब अभिव्यक्ति.

    रामराम.

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  8. बहुत बढिया..सुन्दर रचना..

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  9. सुन्दर प्रस्तुति....

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  10. वाह... उत्तम प्रस्तुति

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  11. बहुत खूब .. सभी बातें महत्वपूर्ण .. समय सबसे बड़ा ...
    उत्तम भाव ...

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  12. बड़ी सुन्दर है भावों की छिटकन।

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