Tuesday, 21 January 2014

मौसम (शीत काल )


 

प्रकृति की देखो  अद्भुत करिश्मा
प्रमुख ऋतू ग्रीष्म ,शीत ,वसंत ,वर्षा
ग्रीष्म में पर्वत पर जलती दावानल
जलकर भस्म हो जाते हैं जंगल|




वर्षा में प्रकृति बरसती है जी भर
प्यासे जीव का प्यास बुझाती
जलप्रलय का खेल भी कभी कभी
मन मौजी से खेलती है प्रकृति |





शीतकाल का क्या कहना
पहाड़ हो या भूमि समतल
पहाड़ों पर होता है हिमपात
रवि-रश्मि भी हो जाती है शीतल !

रजनी रोती है शाम से सुबह
रवि -राज के विरह में 
धरती पर के सब तृण पत्ते
भीग जाते उसके आँसुओं में |

आँसुओं  के धुँध के चादर
बिछ जाती है अवनी पर
उठाती है यह चादर धरती
तब तक हो जाता है दोपहर |

ऊनी  कपडे स्वेटर ज्याकेट
कोई ओडते हैं मोटा कम्बल
घर के अन्दर दुबक जाते सब
'अलाव 'है गरीबों का संबल |





निर्मल श्वेत हिम-चादर से
ढक जाता है गिरि शिखर
पादप भी ओड़कर हिम-चादर
सर्द हवा से कांपते थर थर |






श्वेत रास्ता ,श्वेत झरना, श्वेत है मुकुट पर्वत की
श्वेत है पेड़ पौधे,श्वेत है झील,श्वेत है छतें घर की
श्वेत चाँदनी फैली जब  श्वेत  हिम -चादर पर
उतरती है  अप्सराएँ यहाँ छोड़ देवसभा  इन्द्र की |

मित्रों ! प्रवास के कारण अगले १५ दिन तक नियमित रूप से ब्लॉग पर आ नहीं पाऊंगा परन्तु उसके बाद जरुर हाजिर हो जाऊंगा !


कालीपद"प्रसाद "
सर्वाधिकार सुरक्षित



21 comments:

  1. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
    --
    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा आज मंगलवार (21-01-2014) को "अपनी परेशानी मुझे दे दो" (चर्चा मंच-1499) पर भी है!
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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    1. आपका बहुत बहुत आभार मयंक जी !

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  2. बदलते मौसम का सुन्दर सचित्र चित्रण |

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  3. प्रकृति चक्र पूरा बहता है,
    वह सबके मन का रहता है।

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  4. बहुत बढ़िया
    आभार आपका-

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  5. आ० सर , बहुत ही सुंदर रचना , धन्यवाद
    नया प्रकाशन -: कंप्यूटर है ! -तो ये मालूम ही होगा -भाग - २

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  6. मौसम का सुंदर चित्रण ....

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  7. बहुत सुन्दर प्राकृतिक वर्णन..
    :-)

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  8. waah kya bat hai thande mausam me garam-garam kavita ...

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  9. प्रकृति का बहुत सुन्दर चित्रण किया है आपने

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  10. सुन्दर चित्र एवं चित्रों को सुन्दर शब्दों से परिभाषित करती सुन्दर रचना ! बहुत बढ़िया !

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  11. बहुत सुन्दर चितरण किया है ,,बधाई..

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  12. शब्दों से चित्र खींचा है ... जैसे कोई केनवस हो प्राकृति ...

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  13. चित्र को भाषा में टाँक दिया है आपने तो हमेशा की तरह .... बहुत खूब

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  14. सुंदर अभिव्यक्ति...

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  15. waah manoram chitran prakriti ka

    shubhkamnayen

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  16. प्रकृति का सचित्र वर्णन...

    http://hindihaiku.blogspot.in/


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  17. सुंदर ऋतुओं का चित्रण ...!!

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