Wednesday, 10 September 2014

रब का इशारा **


                                    
चित्र गूगल से साभार


पहले केदार नाथ में प्रलय ,अब काश्मीर में प्रलय
चेत जाओ इंसान ,अब संभालो पर्वतराज हिमालय !

ईश्वर नाराज़ है या प्रकृति ने दिया यह निर्मम दण्ड
बीते वर्ष में भी आई थी यह देव भूमि उत्ताराखंड !

सिन्धु तट जलमग्न होता  है ,तीव्र समुद्री तूफान से
हिमालय पर प्रलय आ रहा है ,क्या दैवीय प्रकोप से ?

सोचो इंसान करो कुछ  उपाय, बंद करो अब शोषण
अत्याचार का करो अंत ,बंद करो धरती का दोहन !

शायद यह है सुप्त संकेत ,भविश्य के बड़े आपदा का
जलमग्न होगा पूरा देश ,काम ना आयगा कोई प्रार्थना !

पाक काश्मीर ,हिन्द काश्मीर ,समझो रब का इशारा 
सबसे है नाराज़ रब ,उसने न माना कोई सीमा रेखा !

डूब गया पूरा काश्मीर ,मरे न जाने कितना इंसान 
कोई न जाने पीड़ित में कौन हिन्दू ,कौन मुसलमान !

(C)   कालीपद "प्रसाद "



7 comments:

  1. मार्मिक रचना .....

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  2. सुन्दर रचना।
    सार्थक पेशकश।

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  3. बिल्‍कुल सच कहा ... सार्थकता लिये सशक्‍त प्रस्‍तुति

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  4. Manav ne diya hai nyota iss vinaash ko.... Bahut badhiyaan abhivyakti!!

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  5. achha laga padhna, achhi rachna.

    shubhkamnayen

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