Saturday, 28 February 2015

हिमालय ने शीश झुकाया है !


कामयाबी उसी का कदम चूमा है
हिम्मत से जिसने मुसीबत को ललकारा है |
फूलों की खुशबु का वही हकदार है
काँटों का चुभन जिसने स्वीकारा है |
अनेक हैं प्यार का दुश्मन ,जहाँ में
हौसले से विजय प्यार का होता है |
आसमान तो खुला उसके लिए है
जिसने हिम्मत से परवाज़ भरा है |
हिमालय ने उसके सामने शीश झुकाया है
झुकने के लिए जिसने उसे मजबूर किया है |

14 comments:

  1. हिमालय ने उसके सामने शीश झुकाया है .
    झुकने के लिए जिसने उसे मजबूर किया है .
    बहुत खूब...

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  2. दुनिया झुकती है झुकाने वाला चाहिये।

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  3. बहुत खूब ... दुनिया शीश झुकाती है हिम्मत होनी चाहिए ... ऊर्जावान शब्द ...

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  4. बहुत बढ़िया , मंगलकामनाएं !

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  5. बहुत सुन्दर

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  6. सुंदर एवं भावपूर्ण रचना...बधाई

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  7. कामयाबी उसी का कदम चूमा है
    हिम्मत से जिसने मुसीबत को ललकारा है |
    सत्य वचन

    http://savanxxx.blogspot.in

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  8. बहुत खूब, बहुत ही अच्‍छी रचना।

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  9. बहुत अच्छी रचना है |

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  10. sundar blog .....
    Come to my blog and read hindi poems written by Rishabh Shukla (me).

    http://hindikavitamanch.blogspot.in/?m=1

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  11. बहुत सुन्दर प्रेरक प्रस्तुति...

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