Thursday, 8 October 2015

ईश्वर के कानून !

ईश्वर के हर नियम-कानून है अलिखित
तोड़ने पर मिलती दण्ड, है यह निश्चित |
लाठी है अदृश्य उनकी, दिखाई नहीं देती
मारते हैं मुजरिम को, आवाज़ नहीं होती |
कौनसा नियम तोड़ने पर, दण्ड कौनसा है
इसका लेखा जोखा, केवल ईश्वर के पास है |
देकर एक शरीर, जीव को धरा पर भेजा है
दण्ड का पहला प्रहार, शरीर पर पड़ता है |
रोग के विषाणु भी, एक सूक्ष्म जीवाणु है
विशाल शरीर में घुसकर, रोग पैदा करता है |
दवाई के असर से, सूक्ष्म जीव मरता है
सूक्ष्म जीव विशाल का प्राण हर लेता है |
कैसा नियम बनाया रब ने, कुछ समझ न आये
चींटी से परेशां हाथी, चाहकर कुछ न कर पाये |

कालीपद ‘प्रसाद’

© सर्वाधिकार सुरक्षित    

5 comments:


  1. आपकी यह उत्कृष्ट प्रस्तुति कल शुक्रवार (09.10.2015) को "किसानों की उपेक्षा "(चर्चा अंक-2124) पर लिंक की गयी है, कृपया पधारें और अपने विचारों से अवगत करायें, चर्चा मंच पर आपका स्वागत है।
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ, सादर...!

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    1. आपका आभार राजेंद्र कुमार जी !

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  2. वाह बहुत सुंदर

    सादर

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  3. बहुत सुंदर. कोई छोटा बड़ा नहीं.

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  4. सुन्दर शब्द रचना
    http://savanxxx.blogspot.in

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