Sunday, 21 August 2016

दोहे

  1. मौसम है बरसात का, मच्छर के अनुकूल
  2. डेंगू और मलेरिया , गन्दी नाली-कूल |
  3. मसक भगाने वास्ते, उत्तम पत्ती नीम   
  4. जलाओ इसे शाम को, नीम का गुण असीम 
  5. छत की टंकी साफ़ हो, घर में पहुँचे धूप
  6. बचने दोनों मर्ज से, करो कुछ दौड़–धूप 
  7. राग द्वेष सब दूर हैं, मन जब होता शांत  
  8. मन वश होता योग से, यही योग सिद्धांत |


© कालीपद ‘प्रसाद’

2 comments:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल रविवार (22-08-2016) को "ले चुग्गा विश्वास से" (चर्चा अंक-2442) पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  2. प्रासंगिक सुंदर रचना...

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