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Tuesday, 5 February 2019





“मानवतावाद का अक्लांत योद्धा"

यह पुस्तक उन सब के लिए अत्यंत पठनीय हैं जो सामाजिक उत्पीड़न, शोषण एवं वंचन के खिलाफ है | उनके लिए भी पठनीय है जो इनके पक्षधर हैं, यह देखने के लिए कि समाज में अब उनकी स्थिति क्या है | 
इस किताब से आपको क्या जानकारी मिलेगी ?
1. कांग्रेस और गांधी जी डॉ आंबेडकर को पसंद नहीं करते थे और न डॉक्टर आंबेडकर कांग्रेस के सदस्य थे, फिर भी डॉक्टर आंबेडकर को संविधान ड्राफ्टिंग कमिटी के अध्यक्ष क्यों बनाया गया ?
2. द्वितीय गोलमेज बैठक में 123 भारतीय नेताओं के नेता मोहनदास करमचंद गांधी की बात को ब्रिटिश प्रधानमंत्री सर मैकडॉनल्ड ने क्यों ठुकरा दी और डॉ आंबेडकर की सारी बातें क्यों स्वीकार कर ली ?
३ . अ )शुरुआत में डॉ आंबेडकर ने जनसंख्या अनुपात में संसद और विधानसभा में शूद्रों के लिए आरक्षण मांगा था, साथ में अलग निर्वाचन (Separate Electorate ) व्यवस्था चाहते थे | उन्होंने नौकरी में आरक्षण की मांग नहीं की, फिर--..
ब ) जॉब रिजर्वेशन किस का फार्मूला था जिसे डॉ अंबेडकर स्वीकार करने के लिए वाध्य हो गए ? क्या यह कांग्रेस का था या गांधी जी का था? और क्यों ? 
स) एरोड़ा जेल में गांधीजी आमरण अनशन किस मांग को लेकर किया ?
४ ) डॉक्टर आंबेडकर को कांग्रेस कांस्टिट्यूशन असेंबली में चुनकर आने देना नहीं चाहते थे |उन्हें कांग्रेस पसंद नहीं करते थे,इसलिए उनकी कोई भी सलाह संविधान में शामिल नहीं करना चाहते थे | पूरे भारत में उनके विरुद्ध नाकाबंदी की गई ताकि वह कंस्टीटूशन असेंबली में चुनकर ना आ सके | लेकिन वह बंगाल से चुनकर आ गए | परंतु उसके बाद ऐसा क्या हो गया कि द्वितीय बार कंस्टीटूशन असेंबली के चुनाव में कांग्रेस के डॉ राजेंद्र प्रसाद ने कांग्रेस के प्रतिनिधि को छोड़ कर डॉक्टर आंबेडकर का पुरजोर समर्थन किया और मुंबई प्रोविंस के प्रधानमंत्री मिस्टर खेर को पत्र लिखकर डॉक्टर अंबेडकर का चुनाव सुनिश्चित करने के लिए निवेदन किया | क्यों ?????????
५. हिंदू कोड बिल की अधिकांश बातें अब हिंदू समाज मानने लगे हैं फिर उस समय विरोध क्यों हुआ ?
६. संविधान के मूल स्वरूप में राजनैतिक ,सामाजिक और आर्थिक आजादी थी, पहले को संविधान में स्वीकार किया गया , बाकी दोनों को क्यों नहीं स्वीकार किया गया ?
इतिहास की इस सच्चाई को नई पीढ़ी को जानना जरूरी है क्योकि उन्हीं को आरक्षण के विरुद्ध आंदोलन करने के लिए पीछे से प्रोत्साहित किया जाता है उन्हें तत्वों को तोड़ मोड़ कर पेश किया जाता है, और नई पीढ़ी सचाई से अनभिज्ञ होकर आंदोलन के माध्यम से सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाती है | 
यह पुस्तक क्रॉसवर्ड (CROSSWORD)मेगा स्टोर पुणे, नोएडा और राजस्थान के कुछ शहरों में उपलब्ध है|
कीमत-- केवल ₹ 250/- 
प्रकाशक और लेखक से सीधे प्राप्त करने पर 40% डिस्काउंट और मुफ्त डाक खर्च का लाभ ले सकते हैं | 
कांटेक्ट नंबर 965 792 7931.. और 942 324 5086

कालीपद 'प्रसाद'

Thursday, 21 April 2016

मेरी प्रकाशित किताबें




   मित्रों ,
        मेरे दो काव्य संग्रह अब बाज़ार में उपलब्ध हैं l प्रथम काव्य संग्रह का शीर्षक है “काव्य सौरभ” |.यह संग्रह प्रति दिन घट रहे घटनाएँ जो हम देखते है, सुनते हैं जैसे सामाजिक ,राजनैतिक, आध्यात्मिक, भ्रष्टाचार,व्याभिचार इत्यादि विषयों पर आधारित है| इसमें प्रेमाभिव्यक्ति है,घृणा है, व्यंग है, भाव है, भक्ति है ,प्रार्थना है |












       

        द्वितीय काव्य संग्रह है “अँधेरे से उजाले की ओर “| जैसा की इसका नाम है यह एक प्रेरणा दायक रचना है | इसमें तीन भाग हैं| प्रथम भाग युवावों के लिए है ,दूसरा भाग प्रौड़ केलिए और तीसरा भाग वृद्ध एवं आध्यात्मिक तत्त्व में रूचि रखने वालों के लिए है परन्तु सभी लोग तीनों भागों का भरपूर आनन्द ले सकते हैं |

               ये दोनों पुस्तके पुणे {महाराष्ट्र } और जयपुर {राजस्थान} के “CROSS WORD “ बुक स्टोर , http://www.bookganga.com/eBooks/Books/details/4921894805939991869?BookName=Kavya-Sourabha and http://www.amazon.in/dp/938431241X/ref=cm_sw_r_fa_dp_ksDRwb0Q83G8J   में उपलब्ध है | पुस्तक अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचे इसी दृष्टि से कीमत कम राखी गई है | प्रत्येक की कीमत केवल ९५/- रू है|

पुस्तक न मिलने की स्थिति में लेखक से संपर्क किया जा सकता है |

कालीपद ‘प्रसाद’
मोब: ०९४२३२४५०८६, ०९६५७९२७९३१ (दोनों पुस्तक के आर्डर पर डाक खर्च फ्री )

Saturday, 16 May 2015

"काव्य सौरभ" की प्रतियाँ ऑन लाइन उपलब्ध है

यह सूचित करते हुए मुझे हर्ष हो रहा है कि मेरी कविता संग्रह "काव्य सौरभ " अब "www.BookGanga.com " में उपलब्ध है | इसे प्राप्त करने के लिए बुक गंगा के वेब साईट में जाकर सर्च  में 'uttkarsh praksashan meerut लिखकर सर्च करें तो उत्कर्ष प्रकाशन के सभी बुक्स के  लिस्ट आपके सामने होगा  या "काव्य सौरभ"  लिखकर भी सर्च कर सकते हैं |इस किताब की कीमत सभी शुल्क के साथ ९५ रु है .फ्री शिपिंग | आपसे सहयोग की आशा के साथ आभार !
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देवी बनाकर किया पूजा , बनाकर पत्थर,मिटटी की मूरत , बना दिया गूंगी, बहरी ,अंधी, अबला और अनपढ़ मुरख। पिंजड़े के पंछी इस पिंजड़े का चंचल पंछी उडता है केवल एक बार, पंख फैली उड़ा जो पंछी लौटकर नहीं आता दो बार।

Copy and WIN : http://ow.ly/KNICZ
देवी बनाकर किया पूजा , बनाकर पत्थर,मिटटी की मूरत , बना दिया गूंगी, बहरी ,अंधी, अबला और अनपढ़ मुरख। पिंजड़े के पंछी इस पिंजड़े का चंचल पंछी उडता है केवल एक बार, पंख फैली उड़ा जो पंछी लौटकर नहीं आता दो बार।

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Thursday, 23 April 2015

काव्य सौरभ (समीक्षा ) --द्वारा -कालीपद "प्रसाद "





मित्रों ,
आपको सूचित करते हुए प्रसन्नता हो रही है की मेरी कवितायों का संग्रह “काव्य सौरभ “ छपकर तैयार हो गया है l .कुछ ही दिनों में BookGanga.com में ऑन लाइन उपलब्ध होगा l .१०४ पेज की यह पुस्तक की कीमत केवल रु ९६ है l .पुस्तक डाक –पोस्ट द्वारा ऑथर से भी प्राप्त किया जा सकता है.l  पुस्तक में सामिल कुछ कविताओं के अंश आपके अवलोकन हेतु नीचे प्रस्तुत हैं l   
सरस्वती वन्दना
हे  माँ वीणा वादिनी शारदे !
शब्द ,भाव, भावना का वर दे ,
शब्द सुकोमल मन-भावन हो ,  
भाव -गम्भीर , सद्-भावना   हो , 
मानव मन के कलुष दूर कर दे
हे  माँ वीणा वादिनी शारदे ! तू वर दे!!
                          नारी के गुण (द्वन्द)

                                  कोमलता ,धैर्य और सहनशीलता
का प्रतिक हूँ मैं ,
कर सकती हूँ असाध्य साधन
अवोध मानवों को सिखलाती  हूँ।
  
प्रेम .....
"प्रेम "  अदृश्य है ,पुष्प गंध जैसा भर देता है मन
एक एहसास है ,एक अनुभूति है , कहते हैं ज्ञानीजन।

वसीयत (पर्यावरण )

               हे मानव !
लिख दो वसीयत अपनी संतति के नाम
न गज ,न बाजी ,न चाँदी ,न कंचन
केवल हरित धरती ,स्वच्छ जल-वायु
और स्वच्छ पर्यावरण !!!

 नारी की पीड़ा (दामिनी )

देवी बनाकर किया पूजा ,                
बनाकर पत्थर,मिटटी की मूरत ,
बना दिया गूंगी, बहरी ,अंधी,
अबला और अनपढ़ मुरख।

पिंजड़े के पंछी

  इस पिंजड़े का चंचल पंछी 
                                       उडता है केवल एक बार,
     पंख फैली उड़ा  जो पंछी 
                                          लौटकर नहीं आता दो बार।

तुम किसान के भाग्य विधाता
किसान के भाग्य-विधाता कोई है ....
तो वह तुम ही हो, हे जलधर!
किसान उगाता फसल ,पेट भरने मानव का
किसान आश्रित है तुम पर।

भारत की माताएं
इंसान हो , समाज हो , या हो कोई शास्त्र,
ललकारो उन्हें ! करो विद्रोह !! उठाओ शस्त्र!!!
तोड़ दो कन्या-दलित  रिवाज़  की  बीमार  जर्जर  जंजीर,
खोल दो सब बंद दरवाज़े ,आने दो सुवासित स्वच्छ समीर।
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 बेटी

बहू है नयी ,जगह नई है ,नया है घरद्वार
हँसकर करो स्वागत उसका,लगे उसको अपना घर
एक घर छोड़कर ,दुसरे घर में बहू बनकर आती है
सरबत में शक्कर ज्यों घुलकर मिठास वह फैलाती है|

माँ है धरती

आओ करे प्रण,सब मिलकर आज
करेंगे रक्षा धरती की, हरयाली की
अपने जीवनकाल में रोपकर दस पौधे
अहसान उतारेंगे हम धरती माँ की |

ये कुछ झलकियाँ है अलग अलग कविताओं  से l आशा ही नहीं मुझे पूर्ण विश्वास है कि  प्रत्येक कविता में निहित केंट्रीय भाव आपके भावुक एवं समेदंनशील मन को छूने मे समर्थ होगा l किसी कविता को पढकर आप उत्तेजित हो जायेंगे तो किसी को पढकर शांति से हौले हौले मुस्कुराएंगे और कभी गंभीर भी हो जायेंगे ll एक बार पढ कर देखिये .....आनंद आयगा l

आपका

कालीपद ‘प्रसाद’

मोब: ९६५७९२७९३१ /९४२३२४५०८६ 
पुणे