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Friday, 2 December 2016

एक शेर :

नोटबंदी कर दिया है  वह बिना सोचे विचारे
ध्यान से देखो किधर अब देश को ले जाता बन्दा
कालीपद 'प्रसाद' 

Tuesday, 14 April 2015

दिल हिल गया है ! (ही )

कुसुम सा कोमल  काया  है
भ्रमित हूँ ,परी है कि  माया है ?

नजदीक से  जब गुज़रता उसके
मन का आँगन सुगंध से भर जाता है l

प्यार क्या है ? नहीं है पता ,किन्तु
दिल हर घड़ी उसका दीदार चाहता है l

एक बार जो छुआ उसको
तन-मन में भूचाल आ गया है  l


तितली सी उडती फिरती मन आँगन में
नज़रों में कभी  वो ,कभी उसकी परछाईयाँ  है l

उसकी नज़र से नज़र जो मिली
चुप थी वो ,पर मेरा दिल हिल गया है l

सलामत रहे वो कयामत तक
राम रहीम से यही मेरी दुआ है l



कालीपद 'प्रसाद'



Thursday, 12 March 2015

सन्त ,साधू और नेता (व्यंग )





पुलिस ढूंढ़ती रही ..चोर उचक्के कहीं नहीं मिले
आश्रम में झंका, सब सन्त-बाबाओं के वेश में मिलेl


होता था सन्तों का सत्संग आश्रम में पहले
एकांतवास में,चेलिओं के बाहों में अब सन्त मिले l

जनता को पाँच साल तक,कोई डाकू लुटेरा नहीं मिले
पांच साल के बाद,व्होट की भीख मांगते सब द्वार पर मिले l

नेता और सन्त ,चोली दामन का है साथ
काली कमाई को सफ़ेद करने ,एकसाथ मिले l

सबके चहरे पर मुखौटे हैं ,नकली है सबके चोले
मुखौटे-चोले उतर गये तो ,अन्दर सब कौवे निकले l 



कालीपद "प्रसाद " 
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