Thursday, 20 September 2018

ग़ज़ल

राही’ तो राह चला करता है
डाह में दुष्ट जला करता है |

चाँद सा चेहरा’ जुल्फों में ज्यूँ 
चाँद बादल में छुपा करता है |

स्वच्छ आकाश में’ इक दो बादल
ज़ुल्फ़ का मेघ हुआ करता है |

प्यार में प्यार जताना हक़ है
प्रेमी इस राह चला करता है |

जख्म दिलदार दिया है, तो क्या
ज़ख्म हरहाल भरा करता है |

काम पूरा हो’ न हो,पर सबकी
रहनुमा बात सुना करता है |

खूबसूरत है.वफ़ा भी है क्या ?
वस्ल में शक्ल दगा करता है |

दिल जहाँ भग्न है, उस रोगी पर  
प्यार अक्शीर दवा करता है |

बेवफा प्रेयसी से गर हो प्यार 
प्यार में शूल चुभा करता है |

बेवफाई हुई इक दिन काली”
प्यार का बुर्ज़ ढहा करता है |


कालीपद 'प्रसाद 

Thursday, 13 September 2018

कविता

मात्रा १६,१५,=३१ , अंत २१२ 
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मीठी मीठी हिंदी बोलें, जन मानस को मोहित करे
सहज सरल भाषा हिंदी से, हम सबको संबोधित करे |
रंग विरंगे फूल यहाँ है, यह गुलदस्ता है देश का
हिंदी के सुगंध फैलाकर, भारती को सुगन्धित करे |
गलती होगी सोचो मत यह, बोलो बेधड़क होकर तुम
गलती करे अहिन्दी भाषी, गलती को संशोधित करे |
भिन्न भिन्न भाषा अनेक, उत्तर दक्षिण ,पश्चिम पूर्व
हिंदी का प्रचार प्रसार हो, सभी को प्रोत्साहित करे |
पूजा चाहे कोई भी हो, काली दुर्गा शंकर विष्णु
हिंदी में सब मंत्र पढ़ें औ, फूल अर्घ सब अर्पित करे |
घर हो या दफ्तर या होटल, हिंदी में ही सब बात करे
आपसी बात हिंदी में ही, अपना विचार प्रेषित करे |
कालीपद ‘प्रसाद’

Wednesday, 12 September 2018

ग़ज़ल


जमाने बाद देखा, प्यार पाने का ख़याल आया
मोहब्बत के तराने गुनगुनाने का खयाल आया |

अभी तक शर्म का पर्दा उठा है, नाक के ऊपर
कुतूहल से उसे अब, आजमाने का खयाल आया |

मिला है वक्त वर्षों बाद, आई दूर से जानम
तमन्ना भी जगी है, प्यार जताने का ख़याल आया  |

सनम के चेहरे में  मंद मुस्कान और आंखें बंद
यही सब देख मुझको मुस्कुराने का खयाल आया |

मिली है दिलनशी मेरी, कयामत बाद हमसे फिर
कहानी जो अधूरी थी, सुनाने का ख़याल आया |

दिलों में कुछ जगह भी थी, उन्हें अनुमान था निश्चित
मेरे दिल में भीअब इक,  घर बसाने का ख़याल आया |

बहारें वक्त पर आई नहीं, पर जीस्त बेपरवाह
अजल के साथ अब रिश्ते निभाने का ख़याल आया |

सनातन कॉल से जो लोग नीचे थे, उन्हें अब क्या
खुशी से तो नहीं, उनको उठाने का खयाल आया |

सियासत दाँव में सब पार्टियां देते प्रलोभन भी
सभी को अब  मोहब्बत ही, लुटाने का ख़याल आया |

कभी हमसे नहीं होती खफा वो दिलनशी मेरी
हुई है आजकालीतो मनाने का खयाल आया |

कालीपद 'प्रसाद'

Monday, 10 September 2018

ग़ज़ल

भाई देकर भाई से’ अलग क्यों कर दिया ?
कभी इकट्ठा ना रहे ऐसा क्यों घर दिया ?
धरती पर्वत तारे विस्तृत अंबर दिया
पूछा प्रश्न हजार नहीं तू उत्तर दिया |
सरकार नरम है, सैनिक भी शरीफ हैं
रक्षक सेना को तुम मार क्यों’ पत्थर दिया ?
शब हो या दिन आवाज गूंजती पल पल
पत्थर गोली बरस रहा क्या मंजर दिया !
देव सभी को अमर किया तू , किंतु बशर
आत्मा है'अमर पर काया क्यों नश्वर दिया ?
सच, मानव जीवन देकर उपकार किया
अपना जीवन संवारने’ का अवसर दिया ?
इंसान किया है ग़फ़लत जीवन भर जब
गलती सुधार का तू मौका अक्सर दिया |
मुझको भेजा जग में करने काम भला
देना था सुख जीवन में, दुख क्यों भर दिया ?
जीवन काटा तेरे’ भरोसे अब कुछ कर
‘काली चमके रवि सम’ रब ने यह वर दिया |
कालीपद 'प्रसाद'

Tuesday, 4 September 2018

जगत में क्यों सदा तनहा रहा हूँ ?

जगत में बारहा आता रहा हूँ
खुदा का मैं बहुत प्यारा रहा हूँ |
वफ़ा में प्यार मैं करता रहा हूँ
निभाया प्यार मैं सच्चा रहा हूँ |
मिले मुझसे यहाँ सब प्यार से यार
मुहब्बत गीत मैं गाता रहा हूँ |
खुदा की यह खुदाई है बहुत प्रिय
खुदाई देखने आता रहा हूँ |
नहीं है दोस्तों में फासला फिर
जगत में क्यों सदा तनहा रहा हूँ ?
हमेशा साथ हम मिलकर रहे पर
मुहब्बत में सदा प्याषा रहा हूँ |
सभी की जो जरुरत थी, मिटाया
लुटाने प्यार मैं दरिया रहा हूँ |
किया है अजनबी की भी भलाई
भलाई का सदा जरिया रहा हूँ |
बुढापा फ़क्त दुख का इक बहाना
दुखी की जिंदगी जीता रहा हूँ
किया है प्यार उसने प्राण भर कर
प्रिया का मैं सदा सजना रहा हूँ |
भुलाया दोष सबका, दोस्त ‘काली’
गिले सब भूलकर अपना रहा हूँ |
 कालीपद 'प्रसाद'

Monday, 3 September 2018

जागो उठो !


सुनो सुनो सब बच्चे प्यारे, यही अनसुनी एक कहानी
किस्सा है भारत वासी का, कुछ लोगों की नादानी |
फूट डालो और राज करो, यही नीति किसने अपनाई 
जात-पात, भेदभाव सबको, यही नीति ने भारत लाई |
अंग्रेज चतुर थे,तुरंत भाँपा, इनमें कितने कौन बुराई
एक-एक कर चुनचुन सारे, जिनकी नीति उन पर चलाई |
समाज बट गया वर्ग में जब, दो भाई में दरार आई
मर्म से मर्म की दूरी बढ़ी, ऊँच नीच खाई गहराई |
जाति,वर्ण,वर्ग,सभी दुश्मन, गुप्त रूप से रंग दिखाया
एक को दिया चैन की नींद, दूजे का सुख चैन चुराया |
अंग्रेज नहीं बदलाव किया, भारत की वो प्राचीन नीति
उससे फायदा उन्हें भी था, अपनाया दमनकारी नीति |
भारत है अब आजाद मुल्क, नीति मुल्क की है संविधान
इसकी तुम अब करना रक्षा, करना इसका सदा सम्मान |
यही दिलाया मान मर्यादा, हमारा किया मस्तक ऊंचा
सुरक्षित रहेगा संविधान, सर न किसी का होगा नीचा |
छेड़छाड़ इस संविधान से, कभी न तुम अब करने देना
यही तुम्हारी त्राण कवच है, इसकी रक्षा में सिर देना |
जान जाय कोई बात नहीं, संविधान की रक्षा करना
इसकी रक्षा में तन मन धन, अपना सभी कुछ लुटा देना |
सरहद पर सैनिक डटे हुए, रक्षा करते आक्रमणों से
चौकन्ना तुमको भी रहना, अंदर के सभी दुश्मनों से |
चुपके चुपके छुपकर करते, जयचंदों की उनकी टोली
खुद के घर को जलाकर कभी, खुशी खुशी खेली है होली |
वंचित,शोषित,पीड़ित जन सब, उठो खड़े हो अपने दम पर
आत्मविश्वास जगाओ अभी, हो जाओ तुम खुद पर निर्भर |
अधिकार नहीं मिला किसी को, हाथ जोड़कर माँगो न कभी
ताकतवर शक्ति छीन लेते, तुम भी छीनो झुकना न कभी |
यह देश है तुम्हारा, मालिक तुम्ही हो इस हिंदुस्तान के
दुश्मनों को भी रखना पास, अपने प्यार में कैद करके |
कालीपद 'प्रसाद'

Tuesday, 28 August 2018

हमारा लोक तंत्र


संविधान है सबके ऊपर, आकाएं देश चलाते हैं
शासन, संसद,न्यायालय ही, सब मसलों को सुलझाते हैं |
लोक तंत्र में लोक है मुख्य, लोग ही तंत्र को लाते हैं
भारत में दशा उलटी हुई, तंत्र जनता को नचाते है |
जन नेता है भगवान यहाँ, गीत यही वे खुद गाते हैं
जनता वोट से जीतकर फिर, जनता को खूब सताते हैं |
झूठे वादे जुमलेबाजी, करने में वे न लजाते हैं
जनता को सिर्फ आधा पेट, खुद भरपेट सदा खाते हैं |
जात-पात भेद-भाव वाली, नीति सब आदम पुरानी है
संविधान ने प्रतिबन्ध किया, इनको यही परेशानी है |
अमीर गरीब में बाँट दिया, लडते हैं सब भाई भाई
यहाँ बेदर्द सब हाकिम है, नहीं न्याय की अब सुनवाई |
नीयत नहीं सही नेता का, चिंता केवल अपनी कुर्सी
मज़बूरी में करते रहते, शहीद के घर मातम-पुरसी* |
और कहे क्या देश हालात, जनता भी अभी सो रही है
‘जागो,उठो’ बुलाया ‘काली’, धीरे जनता जाग रही है |
*घर जाकर संवेदना जताना
कालीपद 'प्रसाद'

नोट : मित्रो  बहुत दिनों से मैं पाठक के कमेन्ट का उत्तर नहीं दे पा रहा हूँ क्योकि वह पब्लिश नहीं होता है  | मैंने गूगल अकाउंट , URL से कोशिश की फिर भी नहीं जा रहा है  | क्या आप मदत कर सकते है ? इस कमेन्ट बॉक्स में लिख दीजिये | सादर |