पाप काटने के लिए, नहीं चढ़ाओ भेंट
शुद्ध सरल मन के बिना, मंज़ूर नहीं भेंट |११|
बिकता नहीं खुदा कभी, रुपये हो या माल
लोचन जल के बूंद दो, दर्शन करो कमाल |१२|
बढ़ते है पापी यहाँ, कौन करेगा नाश
हैं पौत्र रक्तबीज के, होयगा खुद विनाश |१३|
चढ़ा भेंट भगवान को, चाहते कटे पाप
घुस से कुछ होता नहीं, कटौती नहीं पाप |१४|
कर्म फल भुगतना यहीं, जानो यही विधान
क्षमा माँग सजदा करो, निष्फल होता दान |१५|
कालीपद'प्रसाद'