Sunday, 5 January 2014

सर्दी का मौसम! **


शीत ऋतू --- गरीबों पर सितम,सैलानियो का प्रियतम!
                             



                                                बाज़ार ,दुकाने बंद

   

सर्दी का मौसम ,ये बर्फ ,ये बर्फीली हवाएं
ढा रही है सितम ,डरा रही है नभ से काली घटायें
इस कहर से डरकर इंसान हो गए हैं घर में बंद
दुकान बंद,बाज़ार बंद ,इतनी ठण्ड हैं फिजायें |





                                                   सड़क पर लोग
 

 सर्द रात्रि में सड़क पर लोग ठण्ड से ठिठुर रहे हैं 
 कम्बल ओड़कर हाथ पैर सिकुड़कर सो रहे हैं
कम्बल सम्बलहीन अलाव  से ठण्ड भगा रहे हैं
कहीं पी पी कर गरम चाय ,रवि का राह देख रहे हैं|






                                                    पंगु हवाई जहाज

बर्फ और धुँध ने हवाई जहाज को पंगु बना दिया है
धरती पर रेलगाड़ी  को  ब्रेक लगा दिया है
सड़क पर वाहनों का रफ़्तार कम कर दिया है
इंसान की  वुद्धि और क्षमता को ललकारा है |





                                                     हिमपात

पहाड़ों पर कहीं हिमपात हो रहा है
कहीं ओले तो कहीं हिमजल की वर्षा हो रही है
 ठण्डी बर्फीली हवा शीतलहर बन समतल को भी
अपने मजबूत आगोश में ले लिया है |


   
                                                     सैलानी

सैलानी बर्फ के सफ़ेद चादर पर नाच रहे हैं
कहीं स्केटिंग तो कहीं बर्फ से खेल रहे है
कपास के फाहें जैसे गिरते बर्फ के कण
मानो सैलानियों पर श्वेत फुल बरस रहे हैं |

कालीपद "प्रसाद "
© सर्वाधिकार सुरक्षित
 

25 comments:

  1. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
    --
    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा आज रविवार (05-01-2014) को तकलीफ जिंदगी है...रविवारीय चर्चा मंच....चर्चा अंक:1483 में "मयंक का कोना" पर भी है!
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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    1. बहुत बहुत आभार मयंक जी !

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  2. सच कह रहे हैं, हमें घूमने की सूझती है, ग़रीब जीवन के लिये लड़ता है।

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  3. यह विरोधाभास ही दुखी कर जाता है।

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  4. किसी के लिए मजा ,किसी के लिए सजा..
    बहुत दुखद स्थिति है...
    http://mauryareena.blogspot.in/2014/01/mamta-ki-chhanv.html

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  5. sundar v sateek ...samyik rachna .badhai

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  6. सुन्दर प्रस्तुति -
    आभार आपका-
    सादर -

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    1. रैन बसेरे में बसे, मिले नहीं पर आप |
      आम मिला इमली मिली, रहे अभी तक काँप |

      रहे अभी तक काँप, रात थी बड़ी भयानक |
      होते वायदे झूठ, गलत लिख गया कथानक |

      पड़े शीत की मार, आप ही मालिक मेरे |
      तनिक दीजिये ध्यान, सुधारें रैन बसेरे ||

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  7. सार्थक भाव लिए सुंदर रचना ...

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  8. कहीं मज़ा कहीं सज़ा का यह अंतर आहत कर जाता है ! समाज की यह विसंगति एवँ विषमता सचमुच बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है ! अन्यथा हर मौसम का अपना अलग महत्त्व है और मज़ा भी ! बहुत सुंदर रचना !

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  9. सच कह है ... कहीं मारा मारी कहीं आनंद ... पर प्राकृति तो बेखबर है इन सब से ...

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  10. यह भी कुदरत की बात है और मज़बूरी की भी ...बहुत सुन्दर चित्रमय रचना

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  11. यह प्रकृति है सबको यथायोग्य देती है.....
    --- वर्तनी की अशुद्धियाँ अखरती हैं.....

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  12. विषमता ही असल जिन्दगी है..

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  13. आदरणीय बहुत सुंदर व मनोहर , धन्यवाद
    ॥ जय श्री हरि: ॥

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  14. शीत ऋतु का सुंदर चित्रण...

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  15. bahut sundar chitran kiya hai apne is mausam ka

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  16. बात बहुत सही कही और सुन्दर तरीके से कही .. बहुत खूब .

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  17. बहुत सुन्दर और सार्थक प्रस्तुति...

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  18. बहुत सुंदर प्रस्तुति.

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  19. बहुत ही सुन्दर चित्रण ,धन्यबाद।

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  20. आपकी उत्कृष्ट प्रस्तुति का लिंक लिंक-लिक्खाड़ पर है ।। त्वरित टिप्पणियों का ब्लॉग ॥

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  21. सुन्दर प्रस्तुति

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