Thursday, 30 January 2014

सियासत “आप” की !**




हिलगई नींव अब खानदानी महल की
'खास' अब लगाने लगे टोपी 'आम' की l 

बढ़ गई धड़कन सियासत के मुक्केबाजों की 
बेहोश हो रहे बार बार,खाकर मुक्का एक 'आम' कीl 
 
अभिमानी शक्तिशाली भारत भाग्य-विधाता
लोकपाल पास किया ,डर सताए 'आम' की l

भ्रष्टाचारी, बाहुबली पड़ गए सोच में
बिना धन ,बिना बल जीत हुई 'आम' की l  

बड़े बड़े महारथी धुल चाटे समर में
नौशिखिया प्रतिद्वंदी चुनाव जीते 'आम' की l 

कालाधन बाहुबल काम ना आया चुनाव में
हवालात का डर है, भृकुटी तनी है 'आम' की l 

दिल्ली गया ,दरबार गया ,मिटा बरसों की साख
अगली राज किसकी,कांग्रेस,बीजेपी या 'आप' की l

चिंता यही सताती है नमो और राहुल बाबा को
'आप' को कुछ खोना नहीं,जीतेंगे तो राज 'आप' कीl 

घिर गए विवादों में अनुभवहीन जोशीला मंत्री जी
जोश तो जरुरी है ,खोना नहीं होश मंत्री जी l 

जीत का “प्रसाद”मिलकर चखेंगे आम हो या ख़ास
यही वायदा है ,संकल्प भी है आम के 'आप' की l 

कालीपद "प्रसाद "
©सर्वाधिकार सुरक्षित

17 comments:

  1. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
    --
    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल शुक्रवार (31-01-2014) को "कैसे नवअंकुर उपजाऊँ..?" (चर्चा मंच-1508) पर भी होगी!
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  2. बहुत सुन्दर..

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  3. राजनीति अब नहीं, है किसी के बाप की
    सरकार भला सबका करेगी, गर दुआ है आप की...

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  4. आपकी इस प्रस्तुति को आज की राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 66 वीं पुण्यतिथि और ब्लॉग बुलेटिन में शामिल किया गया है। कृपया एक बार आकर हमारा मान ज़रूर बढ़ाएं,,, सादर .... आभार।।

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  5. वर्तमान राजनैतिक परिदृश्य को बखूबी उभारा है ! सुंदर रचना !

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  6. sateek rachan...vartman say judi ....

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  7. उपाधियों की व्याधियों में सिमटी राजनीति

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  8. बहुत ही सुंदर रचना

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  9. बहुत ही सटीक रचना....
    http://mauryareena.blogspot.in/

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  10. वर्तमान राजनीति पे टीका ... सटीक है ...

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  11. बहुत खूब... सटीक अभिव्यक्ति...
    http://himkarshyam.blogspot.in

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  12. सटीक रचना |
    आशा

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  13. सफलता पचा पाना हर किसी के बस कि बात नहीं होती..और खासकर राजनीति में तो बिलकुल नहीं...उत्कृष्ट रचना..आभार

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