Sunday, 4 May 2014

ऐ जिंदगी !




ऐ जिंदगी !
जरा तू बता
तेरी रज़ा क्या  है ?  

कभी तू हँसाता है
कभी तू रुलाता है |
जब मैं चांहू कि मैं हँसु
तब तू मुझे रुलाता है ,
रो रो कर मैं जब
गम से कर लिया प्यार ,
गम के बादल के पीछे से हंसकर
आशा –किरण बनकर
तू करता है दूर
मेरे मन का अन्धकार !
कभी सुख कभी दुःख
कभी उजाला कभी तम,
कभी हँसी कभी रोना
कभी ख़ुशी कभी गम !
धन की बारिश कभी
कभी मुफलिसी नंगा तन
धुप छांह के इस खेल में
टूटता है मेरा तन मन ,
विषमता तुझे प्यारी है
तू ही बता ऐ जिंदगी
तेरी रज़ा क्या है ?

भक्ति से करता हूँ तेरी सेवा
आस्था से करता हूँ तेरी पूजा
मन में कुछ शंकाएं उगाकर
भक्तिहीन बना देता है मेरी पूजा |
शंकित हूँ ,...सोचता हूँ ...
क्या मैं  एक आस्तिक हूँ ?
या मैं  एक नास्तिक हूँ ?
दिया दुःख, सुख से अधिक
यह तेरी क्या माया है
ऐ जिंदगी जरा तू ही बता
तेरी रज़ा क्या है ?

जब करने लगता हूँ विश्वास तुझे
तू  देता है तब , धोखा मुझे,
संदेह के  झूले में झुलाता है हरदम
आगे नहीं बढ़ पाता मैं ,
लडखडाता है मेरा कदम ,
क्या करूँ  क्या ना करूँ ...?
सब कुछ अनिश्चित है
ऐ जिंदगी! जरा तू ही बता
तेरी रज़ा क्या है ?

कालीपद "प्रसाद "
सर्वाधिकार सुरक्षित

26 comments:

  1. बढ़िया व बहुत ही सुंदर लेखन , आनंद अनुभूति , आ. धन्यवाद !
    नवीन प्रकाशन - ~ रसाहार के चमत्कार दिलाए १० प्रमुख रोगों के उपचार ~ { Magic Juices and Benefits }













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  2. बस यही फितरत है ज़िंदगी की। …. सुन्दर रचना

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  3. ईश्वर की लीला अपरम्पार है
    उसके हर संकेत में छिपा
    अतुलनीय विश्वास
    और प्यार है !

    बहुत ही सुंदर रचना !

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  4. जिंदगी एक पहेली
    बहुत ही सुंदर रचना

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  5. इसी को ज़िन्दगी कहते हैं ... अच्छे भाव लिए रचना ...

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  6. zindgi yahi to nahi batati .nice poem .

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  7. ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन विश्व हास्य दिवस - ब्लॉग बुलेटिन मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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  8. ज़िन्दगी कैसी है पहेली, कभी तो हँसाए, कभी ये रुलाए!!
    इस पहेली के हर पहलू को आपने छुआ है!! बहुत ख़ूब!!

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  9. बहुत सुन्दर प्रस्तुति।
    --
    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल सोमवार (05-05-2014) को "मुजरिम हैं पेट के" (चर्चा मंच-1603) पर भी होगी!
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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    1. डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' जी ,आपका सादर आभार !

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  10. रखिये अटूट विश्वास, राह पर डटे रहिये। सुंदर प्रस्तुति।

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  11. यही धूप है, छाँव है तो ज़िन्दगी है. बहुत सुन्दर.

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  12. सुन्दर रचना !
    मेरे ब्लॉग के पोस्ट के लिए manojbijnori12.blogspot.com यहाँ आये और अपने कमेंट्स भेजकर कर और फोलोवर बनकर हमारा अपने सुझाव दे !

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  13. बहुत खूब ....दमदार अभिव्यक्ति

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  14. jindgi bas jindgi hai ....kabhi har kabhi jeet ....bahut sundar

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  15. यही है जिन्दगी.. सुन्दर रचना..

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  16. जिंदगी कभी धूप तो कभी छाँव
    अनिश्चिताओं से भरी जिंदगी
    कभी आह तो कभी वाह
    यही जिंदगी

    बहुत सुन्दर रचना !

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  17. सार्थक रचना ..........
    बस पढ़ने में (तू ) जो की ये सही है (तु.....ये गलत है ) ....पढ़ने में बाधा डालता है

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  18. बहुत सुन्दर .. सार्थक रचना .. बधाई

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  19. बुद्धा और महावीर ने बहुत तपस्या के बाद जीवन के रहस्य को समझा.. सुन्दर रचना

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