मेरे विचार और अनुभुतियों की गुलिस्ताँ में आपका स्वागत है |.... ना छंदों का ज्ञान,न गीत, न ग़ज़ल लिखता हूँ ....दिल-आकाश-उपज,अभ्रों को शब्द देता हूँ ........................................................................ ............. इसे जो सुन सके निपुण वो हैं प्रवुद्ध ज्ञानी...... विनम्र हो झुककर उन्हें मैं प्रणाम करता हूँ |
बहुत सटीक और मर्मस्पर्शी रचना....
ReplyDeleteदुख बरसा है, प्रकृति स्रोत से।
ReplyDeleteमार्मिक प्रस्तुति
ReplyDeleteसटीक रचना !!
ReplyDeleteबेहतरीन सटीक और सत्य को उजागर करती प्रस्तुति
ReplyDeleteबहुत ही सटीक रचना , बहुत बधाई ।
ReplyDeleteदुखद हादसा..मर्मस्पर्शी रचना...आभार
ReplyDeleteबहुत मार्मिक और सटीक सामयिक रचना.
ReplyDeleteरामराम.
सियासत के ठेकेदारों , जाकर देखो इन सब घरों में
ReplyDeleteचापर से नहीं देख पाओगे ,दुःख है जो इनके दिलों में।
Gahre bhav ......marmik rachana ...aabhar.
Aprateem alfaaz nahi mil rahe....
ReplyDeleteविपत्ति के बदल थे जो प्रलय मच गये ,बहुत ही मार्मिक प्रस्तुति
ReplyDeleteमार्मिक पर सत्य को उकेरती सुंदर रचना
ReplyDeleteह्रदय को छूती और आँखें नम करती पोस्ट.
ReplyDeleteसादर
अनु
सटीक एवं मार्मिक रचना
ReplyDeleteत्रासदी का चित्रण मार्मिक ..
ReplyDeleteदर्दनाक हादसा उभेरते हुए ह्रदय को छुती रचना
ReplyDeleteदुखी हृदय की करून पुकार ………. मर्मस्पर्शी
ReplyDeleteदुखी हृदय की करून पुकार ………. मर्मस्पर्शी
ReplyDeleteसटीक, सामयिक दर्द भरी पुकार ।
ReplyDeleteसुन्दर और सटीक रचना |
ReplyDeleteआशा
मार्मिक और दुखद त्रासदी की सटीक रचना
ReplyDeleteउत्कृष्ट प्रस्तुति
सादर