Monday, 22 July 2013

दिल के टुकड़े




गुडिया गिर गई
उसके हाथ ,पैर
टूटकर अलग हो गये।
फ़ेविक़ुइक लाया
उस से जोड़ा ,
गुडिया ठीक हो गई।
 
दिल के टुकड़े को किस से जोडू ?
रिश्ते के मधुर बंधन से बंधा था ,
वो  डोर टूट गया।
किस से बांधूं,कैसे जोडूँ?
बांधूंगा तो गांठ तो  रहेगा ,
जोडूंगा,दरारें तो दिखाई देगी ,
पहले जैसे कभी नहीं होगा।

दिल तो एक सीसा है
हर प्रतिबिम्ब इसमें साफ दिखाई देता है ,
जब सीसे में दरार आती है
प्रतिबिम्ब भी टूट जाता है।

प्रतिबिम्ब ना टूटे ,
इसका इलाज केवल  एक ही है 
 कि…सीसा इतना मैला हो जाय
 कि…उसकी दरारें दिखाई ना दें
प्रतिबिम्ब भी दिखाई नहीं देगा ना टूटेगा । 

दिल में गर कलुष भर जाय
दिल की दरारें भी समाप्त हो जाएगी 
जब वह भाव,भावना,सम्वेदन हीन होगा 
तब उसे टूटने का भय भी नहीं होगा।

रसोई में वर्तन टूटते है 
रसोइए के या वर्तन वाली के हाथ से।
दिल के टुकड़े होते हैं 
नजदीकी यार ,दोस्तों या अपने रिश्तेदारों से।


कालीपद"प्रसाद"


© सर्वाधिकार सुरक्षित

29 comments:

  1. sahi kaha apne....rishton ki ehmiyat uski parwah kam ho gayi hai aajkal...farak bahut kam padta hai logon ko tutne ka....

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  2. बिल्कुल सही कहा आपने....
    दिल अगर टूट जाय तो फिर पहले जैसा नहीं हो सकता ..

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  3. ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन जानिए क्या कहती है आप की प्रोफ़ाइल फोटो - ब्लॉग बुलेटिन मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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  4. प्रशंसनीय रचना - बधाई
    शब्दों की मुस्कुराहट पर .... हादसों के शहर में :)

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  5. टूटा दिन फिर ना जुरे ,जुरे गाँठ पड़ जाए..

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  6. बहुत ही सत्य और सटीक बात कही आपने.

    रामराम.

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  7. रहिमन धागा प्रेम का मत तोड़ो चटकाय,
    टूटे पे पुनि ना जुरै,जुरै गाँठ परि जाय.

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  8. आपकी यह रचना कल मंगलवार (23-07-2013) को ब्लॉग प्रसारण पर लिंक की गई है कृपया पधारें.

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  9. आपका आभार अरुण शर्मा जी !

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  10. सुन्दर रचना

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  11. सच्ची और सटीक बात......
    सादर
    अनु

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  12. टूट गया सो टूट गया ,फिर क्या मिलना क्या जुड़ना ,
    नाज़ुक दिल मत तोड़ दोस्तों चले गये फिर क्या मुड़ना

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  13. यथार्थ को सटीक अभिव्यक्ति देती सुंदर रचना ! बहुत खूब !

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  14. बढ़िया है आदरणीय-
    शुभकामनायें-

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  15. बहुत सुंदर और सार्थक रचना




    यहाँ भी पधारे
    गुरु को समर्पित
    http://shoryamalik.blogspot.in/2013/07/blog-post_22.html

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  16. कुछ चीजें कहाँ जुड़ पाती हैं..

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  17. सटीक रचना .... अपनों के हाथ ही दिल टूटता है ।

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  18. बहुत सुन्दर प्रस्तुति है
    कभी यहाँ भी पधारें और लेखन भाने पर अनुसरण अथवा टिपण्णी के रूप में स्नेह प्रकट करने की कृपा करें
    http://saxenamadanmohan.blogspot.in/

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  19. ॐ शान्ति

    बहुत खूब बहुत खूब बहुत खूब हद के तमाम संबंधों की यही नियति है इसलिए बेहद के बाप कहते हैं -सर्व सम्बन्ध मुझसे ही बनाओ -मामेकम याद रखो ,मनमनाभव।बेहद का सम्बन्ध सिर्फ बाप से होता है .

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  20. sahi kaha aaapane rishton ko aapane sukshm rup men bayan kiya

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  21. दिल अपनों से ही टूटता है क्योंकि आपेक्षा रहती है ...
    ये भाव कभी खत्म नहीं हो पाता ...
    अच्छी रचना है ...

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  22. बहुत सटीक और सार्थक रचना , बहुत खूब ।

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  23. bohat sahi kaha aapne. jab apne hi dil todte hain toh chot bhi bohat gahri lagti hai

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  24. बहुत ही लाजवाब पोस्ट
    सादर

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  25. संवेदनशील ही दिल के टूटने का अहसास कर पाता है..सुंदर भाव !

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