Wednesday, 3 January 2018

ग़ज़ल

मित्रो. से एक निवेदन : मित्रों की टिप्पणी का मैं शुक्रिया अदा नहीं कर पा रहा हूँ क्योंकि नीचे कुछ विकल्प होते हैं जैसे गुगुलअकाउंट ,लाइव जोर्नल .वर्ड प्रेस ओपन id ,URL Anonimous, इत्यादि .इसमें मैं गुगुल चुनकर भेजता हूँ पर पब्लिश नहीं होता | कोई मित्र मुझे बताएं क्या चुनना है ताकि प्रतिक्रिया पब्लिश हो |या कोई और सेटिंग ठीक करना है |

सुन्दर खुशबू फूलों से ही
मोहक मंजर लगता है |
फागुन के आने के पहले
होली अवसर लगता है |
मधुमास में’ टेसू चम्पा,
और चमेली का है जलवा
सोलह श्रृंगार सेधरती दुल्हन,
गुल जेवर लगता है |
काले बादल बरसे गांवों में,
मन के आपा खोकर
जहां भी देखो नीर नीर नीर,
महा सागर लगता है |
फैशन शो में सब बच्चे पहने,
रंग विरंगे पोषाक
कोई दीखता’ राज कुमारी,
कोई जोकर लगता है |
हीरे मोती चुनकर लाये,
पहना है शौक से’ माला 
महँगा है’ हार कहता,
मुझको कंकड़ पत्थर लगता है |
शुभ्र चमकदार चाँदनी का,
पर्त पड़ी है पर्वत पर
सच है या धोखा चन्दा का’,
बिछाया चादर लगता है |
शीत लहर चलती उत्तर से,
करती सबको दुखी यहाँ
ठण्डी का डंक को’ अब
सहना, हमको दूभर लगता है |
पढ़ लिखकर हुए सयाना,
टाई बांधे चलता बेटा
ठाठ बाट देखो उसका
बेटा अब अफसर लगता है |
मीठी है बोली उनकी,
कोयल भी शरमा जाय किन्तु
‘कालीपद’ का’ करारा तंज
ही’, सबको खंजर लगता है |

कालीपद 'प्रसाद'

4 comments:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल गुरूवार (04-01-2018) को "देश की पहली महिला शिक्षक सावित्री फुले" (चर्चा अंक-2838) पर भी होगी।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    --
    नववर्ष 2018 की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

    ReplyDelete
  2. बहुत अच्‍छी रचना

    ReplyDelete
  3. आपको सूचित करते हुए बड़े हर्ष का अनुभव हो रहा है कि ''लोकतंत्र'' संवाद ब्लॉग 'मंगलवार' ९ जनवरी २०१८ को ब्लॉग जगत के श्रेष्ठ लेखकों की पुरानी रचनाओं के लिंकों का संकलन प्रस्तुत करने जा रहा है। इसका उद्देश्य पूर्णतः निस्वार्थ व नये रचनाकारों का परिचय पुराने रचनाकारों से करवाना ताकि भावी रचनाकारों का मार्गदर्शन हो सके। इस उद्देश्य में आपके सफल योगदान की कामना करता हूँ। इस प्रकार के आयोजन की यह प्रथम कड़ी है ,यह प्रयास आगे भी जारी रहेगा। आप सभी सादर आमंत्रित हैं ! "लोकतंत्र" ब्लॉग आपका हार्दिक स्वागत करता है। आभार "एकलव्य" https://loktantrasanvad.blogspot.in/

    ReplyDelete
  4. निमंत्रण पत्र :
    मंज़िलें और भी हैं ,
    आवश्यकता है केवल कारवां बनाने की। मेरा मक़सद है आपको हिंदी ब्लॉग जगत के उन रचनाकारों से परिचित करवाना जिनसे आप सभी अपरिचित अथवा उनकी रचनाओं तक आप सभी की पहुँच नहीं।
    ये मेरा प्रयास निरंतर ज़ारी रहेगा ! इसी पावन उद्देश्य के साथ लोकतंत्र संवाद मंच आप सभी गणमान्य पाठकों व रचनाकारों का हृदय से स्वागत करता है नये -पुराने रचनाकारों का संगम 'विशेषांक' में सोमवार १५ जनवरी २०१८ को आप सभी सादर आमंत्रित हैं। धन्यवाद !"एकलव्य" https://loktantrasanvad.blogspot.in/

    ReplyDelete