Thursday, 17 September 2015

गणपति वन्दना


                             

                                                      

                   ॐ गं गणपतये नम:

 जय जय जय गणपति, जय निधिपति
जय जय जय विघ्नहन्ता, जय ब्रातपति |
एकदन्त गजकर्ण, दिव्य गज मुंडधारी
मोदक प्रिय सिद्धिदाता, मूषक सवारी |
विघ्ननाशक विनायक, जय मंगल मूर्ति
सौभाग्य संपत्ति दाता, गौरीपुत्र गणपति |
भाद्र मास, शुक्ल पक्ष, तिथि है चतुर्थी
गणेश जी का जन्मदिन पावन चतुर्थी |
वसंत में टेसू का फुल, पतझड़ में नवांकुर
कष्टहारी आनंद सागर, मुमूर्ष में आशान्कुर |
गणाध्यक्ष गणदेवता, ज्ञान वुद्धि विद्या दाता
सृष्टि-स्थिति, रिद्धि-सिद्धि, शुभ-लाभ प्रदाता |
जय जय जय गणपति, जय निधिपति
जय जय जय विघ्नहन्ता, जय ब्रातपति |

   कालीपद ‘प्रसाद’
© सर्वाधिकार सुरक्षित

8 comments:

  1. आपकी यह उत्कृष्ट प्रस्तुति कल शुक्रवार (18.09.2015) को "सत्य वचन के प्रभाव "(चर्चा अंक-2102) पर लिंक की गयी है, कृपया पधारें और अपने विचारों से अवगत करायें, चर्चा मंच पर आपका स्वागत है।
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ, सादर...!

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  2. आपका आभार राजेंद्र कुमार जी !

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  3. बहुत सुन्दर...गणेश चतुर्थी की हार्दिक शुभकामनाएं

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  4. बहुत सुन्दर गणपति वंदना
    श्री गणेश जन्मोत्सव की हार्दिक मंगलकामनाएं!

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  5. सुंदर गणेश स्तवन। गणेश उत्सव की मंगल कामनाएँ।

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  6. सुन्दर व सार्थक रचना प्रस्तुतिकरण के लिए आभार..
    मेरे ब्लॉग की नई पोस्ट पर आपका इंतजार....

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  7. गंपतिबप्पा मोरया ! जय जय जय जय गणेश जय गणेश देवा !

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