Wednesday, 25 December 2019

ग़ज़ल


जिंदगी में यही’ पल शाद आया
जश्न का वक्त कि जल्लाद आया |

कौन बेपीर ये’ बेदाद आया
ध्यान देना जरा’ उन्माद आया |

सब सितमगर मिले दुनिया में
मेहरबां देख खुदा याद आया |

और करना न शरारत बगां में
तीर लेके अभी’ सैय्याद आया |

चाह थी शाद मिले जीवन में
अजनबी ये दिले’ नाशाद आया |

शांति फैलाने’ ही’ आया गाँधी
गाँधी’ को मार उगरबाद आया |

क्यों प्रगति भी पड़ी धीमी ‘काली’
अर्थ शासन में’ही’ अवसाद आया |

कालीपद 'प्रसाद'

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