Thursday, 11 May 2017

दोहे

, गौतम बुद्ध के मूल उपदेश चार दोहे में ( एक प्रयास )
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जाति क्षेत्र के नाम से, समाज को ना बाँट
धर्म पन्थ भाषा नहीं, दोष गुणों पर छाँट |

समता ममता सब रहे, भाव भावना मूल
एक बद्ध कर चेतना,  भेद भाव है शूल |

तृष्णा इच्छा मूल है, कारण सब दुख दर्द
दीप स्वयं अपना बनो, और बनो हमदर्द |

जीव कामना शून्य हो, अहंकार मिट जाय
शील प्रज्ञा साधना, समाधि एक उपाय |***

नाच गान जो भी किया, मानव सभी प्रकार
कीर्तन जैसा गान में, है आनंद अपार |


कालीपद ‘प्रसाद’

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