Wednesday, 27 March 2019

हम कहाँ जा रहे हैं ?

हम कहाँ जा रहे हैं ? दुनिया विकास की राह पकड़, आगे ही बढ़ी जा रही है, विश्व मंच पर ज्ञान विज्ञान, की अब तारीफ हो रही है |
उद्योग चीन के घर घर में, अब जोरों से पनप रहे हैं चीन में बने बम ओ बाजी, अब हिंदुस्तान में फट रहे हैं |
हिन्दोस्तां विज्ञान छोड़कर, मंदिर मस्जिद बना रहे हैं, विकास का मार्ग छोड़ कर, हम मध्य युग में जा रहे हैं |
टीवी चैनल दिन और रात सदाचार का करते कलरव किंतु देश में बलात्कार का, होता रहता प्रतिदिन तांडव |
आशा, राम-रहीम को सुना, है कोई लाभ प्रवचनों से ?
जनता की बर्बादी होती, चैनल बनते धनी इसी से |
आर्थिक उन्नति सभी का लाभ, पश्चिम में मुद्दा होता है, भारत में पार्टी चुनाव में, घूस का प्रस्ताव रखता है |
मुफ्त गैस फिर ऋण माफ़ कहीं, विकास को भूला देते हैं, अनपढ़, निरीह, बेवस मानुष, भीख लेकर वोट देते हैं |
कलीपद 'प्रसाद'

9 comments:

  1. आपकी लिखी रचना "मुखरित मौन में" शनिवार 30 मार्च 2019 को साझा की गई है......... https://mannkepaankhi.blogspot.com/ पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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    1. सादर आभार आ यशोदा बहन जी

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  2. कौन जा रहा है? कहिये ले जाये जा रहे हैं :)

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    1. सादर आभार आ सुशील कुमार जी

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  3. आपकी इस पोस्ट को आज की बुलेटिन विश्व रंगमंच दिवस और ब्लॉग बुलेटिन में शामिल किया गया है। कृपया एक बार आकर हमारा मान ज़रूर बढ़ाएं,,, सादर .... आभार।।

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  4. सादर आभार आ हर्षवर्धन जी

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  5. Aaj ke Halat par sundar Kavita. Badhayi Sir.
    Shayad ye bhi aapko pasan aaye: Congress grass in india & Salkhan fossil park

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