Tuesday, 26 February 2013

क्षणिकाएँ

ठुकराया तुमने , आने से मना किया ,मेरे साथ 
दुखी हूँ,पर खुश हूँ ,तुम्हारी यादें तो हैं मेरे साथ।     ...............(१ )

भूलना चाहूँ ,पर भूल ना पाऊं तुझे,क्या करूँ ?  
कितना करूँ कोशिश ,तू याद आ ही जाती मुझे।   ...................(२ )

जब जब भरने लगते हैं  पुराने घाव मेरे
कुरेदकर ताजाकर जाता है याद तुम्हारे।    .............................(.३ )

अरसों बाद उनको पुराने रिश्ते यूँ याद आ  गई
जैसे ठंडी बासी कड़ी में उबाल आ गई।   .................................(४)

दुनियां  की रीति बड़ी अजीब है भैया
कैसे कैसे नियम बनाया है कन्हैया
रोते हुए आते देख, हँसते हैं दुनियाँ 
हँसते  हुए जाते देख, रोते हैं दुनियाँ।   .....................................(५ )

हल्दी रंग लाती है ,मेहंदी बनाती  है दुल्हन को खुबसूरत
लाती है बदन  में सु-बास  और व्यवहार  में नज़ाकत
सुना है बढ़ जाती है चंचलता और  नाखरेपन दुल्हन की
लौट कर आती है जब हनीमुन  मनाने के बाद।  .....................(६ )


कालीपद "प्रसाद " 
© सर्वाधिकार सुरक्षित





18 comments:

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    धन्यवाद
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  2. आपकी उत्कृष्ट प्रस्तुति बुधवारीय चर्चा मंच पर ।।

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  3. बहुत ही सार्थक प्रस्तुति,आभार आदरणीय.

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  4. दुनिया के ये अजब खेल भी तो माया है कन्हैया की ...
    बहुत खूब ...

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  5. बेहतरीन क्षणिकायें

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    1. aapke site me kuchh khamiyan hai .ye dikha raha hai "MySQL server has gone away" check kijiye .

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  7. This comment has been removed by the author.

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  8. भाव युक्त सहज अभिव्यक्तियाँ जीवन और जगत की यादों के कारवाँ की .

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  9. बेहतरीन भावपूर्ण सुंदर भाव अभिव्यक्ति ,

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  10. शुक्रिया आपकी टिपण्णी का इस महत्वपूर्ण भाव मय क्षणिका श्रृंखला का .भाव कणिकाएं हैं ये .

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  11. आनंद आनंद बहुत अच्छा
    मेरी नई रचना
    ये कैसी मोहब्बत है

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