Tuesday, 16 December 2014

नारी !*





नारी को जो कमजोर समझे, वो गलत है
नारी पुरुष जैसा है, ए बात भी गलत है l 

सहनशीलता है नारी में पुरुष से बहुत ज्यादा
सोचो गर पराकाष्ठा है नारी, तो यह गलत है l

है प्रेम ,सहानुभूति ,भाव-भावना नारी में अधिक
गर सोचो विवेकहीन है नारी ,तो यह गलत है l

प्रकृति ने बनाया है नारी,कम जिस्म-बल देकर
गर सोचो वुद्धि में भी दीन है ,तो यह गलत है l

एक थी मणिकर्णिका,बनी अमर शहीद लाक्ष्मी बाई
और नारी में नहीं है हिम्मत,यह बात भी गलत है l 

कल्पना करती है ,कल्पना उडती है अन्तरिक्ष में
विज्ञानं नहीं है उसके वश में,यह बात भी गलत है l 

नारी में है हर वो सूक्ष्म गुण,जो है हर इंसान में
पुरुष में भी नारी का हर गुण है,यह बात गलत है l    

कालीपद "प्रसाद 
सर्वाधिकार सुरक्षित

9 comments:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल बुधवार (17-12-2014) को तालिबान चच्चा करे, क्योंकि उन्हें हलाल ; चर्चा मंच 1829 पर भी होगी।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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    1. आपका आभार डॉ रूपचन्द्र शास्त्री जी !

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  2. नयापन लिए है ये रचना ......साधुवाद

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  3. बहुत सुन्दर और सार्थक प्रस्तुति...

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  4. नारी महान है ... सब कुछ सक्षम है उसके लिए ...

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  5. बिलकुल सही कहा. स्त्रियाँ कम नहीं है कमतर न आँकना चाहिए.

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  6. भावपूर्ण प्रस्तुति |

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