Friday, 5 April 2013

सुहाने सपने



सुहाने सपने 

 सपने सभी देखते हैं। चाहे बच्चे हो ,जवान हो या बूढ़े। ये सपने कभी मन को गुदगुदा जाता है तो कभी डराता और कभी  रात भर तंग करता है। देखिये कैसे ?
(यह पोस्ट करीब  एक घंटा पहले पब्लिश किया गया था परंतु मुझे  यह जानकारी दी गई की पोस्ट में कुछ गड़बड़ है। इसलिए दो बार टाइप कर पोस्ट कर रहा हूँ।असुविधा के लिए खेद है।)  





सुहाने सपने !


तुम कौन हो ?
जो मुझे नींद में सताती हो
अनर्थ शोर गुल मचाती हो
मिठी  नींद की गोद से उठकर
दूर, कहीं दूर निर्जन में ले जाकर
कभी आकाश ,कभी पाताल
कभी मृत्युलोक की सैर कराकर
वन,उपवन, कभी चमन की बहारे दिखाकर,
ख्वाबों के झरोखे से झांक कर
मिठी मिठी बातें कर
एक मीठा सा दर्द देकर
रातभर मुझको सताकर
स्वम न जाने कहाँ खो जाती हो।
तुम कौन हो ?


तुम  कौन हो ?
बड़ी मासूम कातिल हो
राख में छुपी आग हो ,
मासूम चेहरा दिखाकर
लजिली आँखे झुकाकर
मिठी मिठी मुस्कुराकर
बिना तीर और तलवार के
तुम करती हो शिकार।

मूक आवाज में तुम बात करती हो
मुस्कुराकर अर्थ समझाती हो
किन्तु अर्थ समझने के पहले
मेरी मिठी नींद उड़ा के
हवा में आंचल लहरा के
काले काले अलकों से मुहं छुपाके
तुम परी राज्य में चली जाती हो
तुम कौन हो ?

तुम कौन हो ? सपने !
मुझ से छल  न करो
मुझको ये हसीं सपने न दिखया  करो
मेरी नींद में न बाधा बना करो
क्योंकि
मैं चेतना हूँ तो तुम सपना हो
मैं सत्य हूँ  तो तुम अलीक  हो 
दूर , कहीं दूर की ये हरियालियाँ
न मुझको दिखाया करो
मुझको न सताया करो।


कालीपद " प्रसाद "
सर्वाधिकार  सुरक्षित 






26 comments:

  1. देवनागरी में सुविधा होती -
    शुभकामनायें-

    ReplyDelete
  2. Replies
    1. धन्यवाद डॉ निशाजी , मैंने ठीक कर दिया है .पहले सुशा लिपि में लिखा गया था

      Delete
  3. सुहाने सपने अच्छे सपने बुने हैं आदरणीय बढ़िया है बधाई

    ReplyDelete
  4. अंतिम छंद में चल की जगह छल होना चाहिए..सुंदर कविता..आभार!

    ReplyDelete
  5. sapne bhi hamara ek sansaar hain jiski rchna ham karte hain.
    behtreen rchanaa.

    ReplyDelete
  6. सपने आशाएं भी जागते हैं...सुंदर कविता..आभार!

    ReplyDelete
  7. कल्पना के पंख लगाकर अनंत लोक की सैर कराते सुन्दर सपने ... बहुत खूब!

    ReplyDelete
  8. बेहतरीन प्रस्तुति ,जिज्ञासा मूलक .खाब और नींद की बुनावट पर .

    ReplyDelete
  9. वाह...
    बहुत बढ़िया रचना...

    सादर
    अनु

    ReplyDelete
  10. वाह !!! बहुत उम्दा अभिव्यक्ति,सुंदर रचना,,,

    Recent post : होली की हुडदंग कमेंट्स के संग

    ReplyDelete
  11. आज की ब्लॉग बुलेटिन क्यों 'ठीक है' न !? - ब्लॉग बुलेटिन मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

    ReplyDelete
  12. बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति..आभार

    ReplyDelete
  13. बेहतरीन अभिव्यक्ति सपनों की,आभार.

    ReplyDelete
  14. काश कि सपने सदा सच ही होते ... सुंदर रचना

    ReplyDelete
  15. सुन्दर प्रस्तुति | शुभकामनायें हम हिंदी चिट्ठाकार हैं

    BHARTIY NARI

    ReplyDelete
  16. वाह! बहुत सुन्दर प्रस्तुति . सपनों का अच्छा ताना बाना बुना आपने.

    ReplyDelete
  17. सुन्दर प्रस्तुति !!

    ReplyDelete
  18. सपने तो आएंगे ही नींद में ... ओर छलेंगे भी ...
    उनको जाते में देखने की आदत डालना ठीक है ...

    ReplyDelete
  19. सुंदर प्रस्तुति!!

    ReplyDelete
  20. बड़ी ही सुन्दर प्रस्तुति, स्वप्न जीवन की राह बन जाते हैं।

    ReplyDelete
  21. सुनहरे सपनो के आकास में विचरण

    ReplyDelete
  22. आपकी यह रचना बहुत ही सुंदर है…
    मैं स्वास्थ्य से संबंधित छेत्र में कार्य करता हूं यदि आप देखना चाहे तो कृपया यहां पर जायें
    वेबसाइट

    ReplyDelete