Tuesday, 3 January 2017

फल -महिमा -दोहे

मधुर आम उपवन उपज, करते सब रस पान |
तिक्त करेला कटु बहुत, करता रोग निदान ||
काला जामुन है सरस, मत समझो बेकार |
दूर भगाता मर्ज सब, पेट का सब बिकार ||
पपीता बहुत काम का, कच्चा खाने योग्य |
पक्का खाओ प्रति दिवस, है यह पाचक भोज्य ||
खट्टा मीठा रस भरा, अच्छा है अंगूर |
खाओ संभल के इसे, अम्ल कारी प्रचूर ||
मीठा होता सन्तरा, ज्यों अंगूर-शराब |
रस इसका खुल पीजिये, पाचन अगर ख़राब ||
कलिन्दा सभी मानते, उपज ग्रीष्मकालीन |
खाता हरेक चाव से, मुहताज या कुलीन ||
छाल इस पर हराभरा, अन्दर पूरा लाल |
रस पीओ ठण्डा करो, जैसा हो अनुकाल ||
रोगी सभी प्रकार के, करे सेवन अनार |
आंव,कब्ज कै दस्त भी, होता दूर विकार ||
द्रव्य पचाने में निपुण, गुणवान अनन्नास |
करता बाहर अम्लता, ऐसा है विश्वास ||
कदली खाओ प्रेम से, पर भोजन के बाद |
रिक्त पेट कदली सदा, करत काय बरबाद ||


@कालीपद ‘प्रसाद’

2 comments:

  1. ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन, "ठण्ड में स्नान के तरीके - ब्लॉग बुलेटिन “ , मे आप की पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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  2. दिनांक 04/01/2017 को...
    आप की रचना का लिंक होगा...
    पांच लिंकों का आनंद... https://www.halchalwith5links.blogspot.com पर...
    आप भी इस प्रस्तुति में....
    सादर आमंत्रित हैं...

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