Tuesday, 16 April 2019

ग़ज़ल

जनता तमाम जपती माला है’ आप ही का
यह काफिला मुखौटा पहना है’ आप ही का |

जय कार लग रहा चारों ओर आपके नाम
बेजोड़ है, अनोखा जलवा है’, आप ही का |

जो भी किया उन्होंने वादा, नहीं निभाया
इस इंतखाब में सब वादा है’ आप ही का |

इस देश से सभी भ्रष्टाचार खत्म करना
वादे का’ क्या हुआ जो सपना है’ आप ही का |

इस देश में अभी तक दिलगीर१ थे सभी लोग
खुश हाल तो नहीं था कहना है’ आप ही का |

इफरात माल जिसने तौफीक२ से कमाया
वह और कौन? वह तो साला है’ आप ही का|

वह आपका नहीं, कहते हैं आप, मानते हैं 
पर देश पूछता रिश्ता क्या है’ आप ही का ?

१ दुखी २ देव योग

कालीपद 'प्रसाद'

1 comment: