Tuesday, 2 April 2019

ग़ज़ल


मंत्रीपद के लिए दिल मचलने लगे
रहनुमा स्वयं पार्टी बदलने लगे |

सिर्फ सिद्धांत का अर्थ कुछ भी नहीं
स्वार्थ में अर्थ भी तो बदलने लगे

घूस देने सभी पार्टियां है चतुर
रहनुमा के कदम भी फिसलने लगे |

लाख पंद्रह नहीं आ सका तो अभी
अपने वादे से नेता पलटने लगे |

तेज आदित्य,  माहौल भी गर्म है
गर्म वैशाख में तन झुलसने लगे |

दल बदल अब तलक चल रहा है अबाध
मामला इंतखाबी  उलझने लगे|

ढूंढते, कौन पैसा अधिक दे रहा
दल बदल करनेवाले भटकने लगे |

कालीपद 'प्रसाद'

23 comments:

  1. बहुत खूब ..
    अद्भुत लेख!

    Hindi Panda

    ReplyDelete
    Replies
    1. सादर शुक्रिया अनु शुक्ल जी |

      Delete
  2. बहुत ही बेहतरीन गज़ल

    ReplyDelete
    Replies
    1. तहे दिल से शुक्रिया रीना मौर्य जी

      Delete


  3. जी नमस्ते,
    आपकी लिखी रचना 3 अप्रैल 2019 के लिए साझा की गयी है
    पांच लिंकों का आनंद पर...
    आप भी सादर आमंत्रित हैं...धन्यवाद।

    ReplyDelete
    Replies
    1. साझा करने के लिए सादर आभार पम्मी सिंह 'तृप्ति " जी

      Delete
  4. ब्लॉग बुलेटिन की दिनांक 02/04/2019 की बुलेटिन, " २ अप्रैल को राकेश शर्मा ने छुआ था अंतरिक्ष - ब्लॉग बुलेटिन “ , में आप की पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

    ReplyDelete
    Replies
    1. सादर आभार शिवम् मिश्रा जी

      Delete

  5. सिर्फ सिद्धांत का अर्थ कुछ भी नहीं
    स्वार्थ में अर्थ भी तो बदलने लगे
    बहुत खूब

    ReplyDelete
    Replies
    1. सादर आभार ज्योति सिंह जी

      Delete
  6. बेहतरीन ग़ज़ल। सादर बधाई।

    ReplyDelete
    Replies
    1. तहे दिल से शुक्रिया वीरेंदर सिंह जी

      Delete
  7. Replies
    1. सादर आभार अनुराधा चौहान जी

      Delete
  8. बहुत सुंदर ग़ज़ल

    ReplyDelete
    Replies
    1. शुक्रिया अनुराधा चौहान जी

      Delete
  9. बहुत ही शानदार गजल सार्थक सुंदर ।

    ReplyDelete
    Replies
    1. तहे दिल से शुक्रिया मन की वीणा जी

      Delete
  10. बहुत सुन्दर समसामयिक गजल...
    वाह!!!

    ReplyDelete
    Replies
    1. शुक्रिया सुधा देवरानी जी

      Delete
  11. Replies
    1. शुक्रिया आनंद विक्रम त्रिपाठी जी

      Delete
  12. शुक्रिया आनंद विक्रम त्रिपाठी जी

    ReplyDelete