Tuesday, 22 October 2013

मैं

"मैं "
एक शब्द रूप हूँ ......
प्रतिनिधि हूँ  उसका 
जो अलौकिक है 
परलौकिक है
अदृश्य है 
अस्पर्शनीय है
किन्तु श्रब्य है 
चेतन है
गतिमान है
वह उत्पत्ति का केंद्र है |

भौतिक दृश्य जगत से परे
कौन हैं वहाँ?
मैं कहता हूँ   - "मैं हूँ "
तुम कहते हो ---"मैं हूँ "
वह कहता है ......"मैं हूँ "

"मैं " अर्थात     अहम्  म्  म् म् .........म्म्म्म्मम्म्म्म्म् है यह ब्रह्मनाद 
"हूँ "  अर्थात     हुम् .....म् म् म्-------म्म्म्म्म्म्म्म्म्   यह भी है ब्रह्मनाद 

मैं मैं मैं ................
सब "मैं' मिलकर बनते हैं "हम "
हम अर्थात -हम् म् म्..........म्म्म्म्म्म्म्म्+अ .......अन्तहीन अह्नाद ..
अह्नाद समाहित है ब्रह्नाद में 
सबकी उत्पत्ति के मूल में |

ब्रह्म नाद अदृश्य है 
यह अस्पर्शनीय  है 
यह अलौकिक है 
यह परलौकिक है 
किन्तु यह श्रब्य है 
यह चेतन है 
यह गतिमान है |  

सुन सकते हो, तो सुनो निर्जन में
रखो अंगुली अपने कर्ण मुल में
आँख मुंदकर आजाओ ध्यान मुद्रा में
स्थिर कर चंचल मन को
सुनो ध्यान  से " हूँ.... "कार को 
यही है "मैं' "हूँ " " अहम् " " हम ' का अन्तिम रूप 
यही है हर शब्द का ब्रह्मरूप ,
यह अनन्त है 
यह अदृश्य है 
यह अविनाशी है 
यह सर्वव्यापी -सर्वत्र है 
स्वयंभू है 
ब्रह्मनाद है ,
सृष्टि का मूल है | अंत भी है |

अहम्  आदि है -सृष्टि है 
अहम् मध्य है -स्थिति है 
अहम् अन्त है -संहार है 
अहम् ब्रह्मा विष्णु महेश है 
यही है  अ  -उ -म अर्थात ॐ 
सृष्टि स्थिति और  शेष 
"मैं" में विलीन हैं 
ब्रह्मा विष्णु महेश|


कालीपद "प्रसाद"

© सर्वाधिकार सुरक्षित





45 comments:

  1. आपकी लिखी रचना मुझे बहुत अच्छी लगी .........
    बुधवार 23/10/2013 को
    http://nayi-purani-halchal.blogspot.in
    में आपकी प्रतीक्षा करूँगी.... आइएगा न....
    धन्यवाद!

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  2. बहुत सुन्दर है सब कुछ जो लिखा है। डूबकर इतरा कर भाव में भक्ति राग में। अपने निज स्वरूप में।

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  3. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
    --
    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा आज मंगलवार (22-10-2013) मंगलवारीय चर्चा---1406- करवाचौथ की बधाई में "मयंक का कोना" पर भी होगी!
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    करवा चौथ की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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    1. आपका आभार रूपचंद्र शास्त्री जी !

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  4. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!सादर...!

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  5. वाह सुन्दर व्याख्या .....

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  6. वाह बहुत सुन्दर प्रस्तुति..

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  7. शब्द हमारे संबंधों का माध्यम है।

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  8. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...

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  9. उत्कृष्ट काव्य रचना

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  10. बहुत ही उम्दा उत्कृष्ट अभिव्यक्ति ,,,! बधाई ,,,

    RECENT POST -: हमने कितना प्यार किया था.

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  11. नमन आपके जज्बात को
    मंगलकामनाएं
    सादर

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  12. बहुत सुन्दर प्रस्तुति। ।

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  13. बहुत खूब ... पर कभी कभी मैं अहम भी हो सकता है ... जो दूर ले जाता है अहम् से ...

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    1. आप सही है, पर "अहम" एक भाव है "मैं " -अहम् भाव नहीं कर्ता है | आभार

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  14. सुन्दर प्रस्तुति "मैं" अहम और अहंकार का दूसरा नाम है

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  15. इस रचना में ध्यान का प्रयोग भी बताया है जो की बहुत बढ़िया है
    यदि प्रयोग हो तो अनुभव का अधिक आनंद है !

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  16. अनुपम भावों का संगम ....

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  17. मैं को सार्थक शब्दों में प्रस्तुत किया है ....

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  18. बहुत ही गहन भाव.... और मैं ही शिव हूँ..... के भाव का अच्छा चित्रण के साथ अभिव्यक्ति

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  19. ...................................................................nice

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  20. गीता का सारांश पढ़, रविकर भाव विभोर |
    कर्म भक्ति का पथ पकड़, चले ब्रह्म की ओर |

    सादर-

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  21. आपकी उत्कृष्ट प्रस्तुति का लिंक लिंक-लिक्खाड़ पर है ।। त्वरित टिप्पणियों का ब्लॉग ॥

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  22. सुन्दर प्रस्तुति..

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  23. सब 'मैं' मिलकर बनते है हम …अति सुन्दर सार्थक रचना के लिए आभार

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  24. बहुत सुन्दर प्रस्तुति..
    आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आप की इस प्रविष्टि की चर्चा शनिवार 26/10/2013 को बच्चों को अपना हक़ छोड़ना सिखाना चाहिए..( हिंदी ब्लॉगर्स चौपाल : 035 )
    - पर लिंक की गयी है , ताकि अधिक से अधिक लोग आपकी रचना पढ़ सकें . कृपया पधारें, सादर ....

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  25. वाकई बहुत खूबसूरती से शब्दों का प्रयोग करते हैं आप..
    सुन्दर लेख

    मेरी दुनिया.. मेरे जज़्बात..

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  26. निशब्द कर दिया आपकी रचना ने .....
    प्रणाम स्वीकारें

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  27. शानदार अनुभूति परक रचना ।
    यहाँ भी आपके विचार आमंत्रित हैं >> http://corakagaz.blogspot.in/2013/03/tera-vistaar.html & >> http://corakagaz.blogspot.in/2012/07/blog-post.html

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  28. आपके ब्लॉग को ब्लॉग - चिठ्ठा में शामिल किया गया है, एक बार अवश्य पधारें। सादर …. आभार।।

    नई चिठ्ठी : चिठ्ठाकार वार्ता - 1 : लिखने से पढ़ने में रुचि बढ़ी है, घटनाओं को देखने का दृष्टिकोण वृहद हुआ है - प्रवीण पाण्डेय

    कृपया "ब्लॉग - चिठ्ठा" के फेसबुक पेज को भी लाइक करें :- ब्लॉग - चिठ्ठा

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  29. बहुत ही बेहतरीन और सार्थक रचना...
    लाजवाब...
    :-)

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  30. बेहतरीन अभिवयक्ति.....

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  31. आपकी यह रचना बहुत ही सुंदर है…
    मैं स्वास्थ्य से संबंधित छेत्र में कार्य करता हूं यदि आप देखना चाहे तो कृपया यहां पर जायें
    वेबसाइट

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